मंगलवार, जुलाई 18, 2017

भूल गये गांव.....

शहरी  हंगामें  में भूल  गये  गांव।
पनघट, चौबारे और पीपल की छांव।
बात-बात बिछती शतरंजी बिसात,
क़दम-क़दम चालें है, क़दम- क़दम दांव ।
         🍀 - डॉ वर्षा सिंह

2 टिप्‍पणियां:

  1. यही हाल है अभी तो, शुभकामनाएं.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. ताऊ रामपुरिया जी,
      टिप्पणी देने के लिये आपका आभार

      हटाएं