सोमवार, नवंबर 20, 2017

मैं और मेरी माताश्री श्रीमती डॉ. विद्यावती " मालविका " 

मेरी माताश्री श्रीमती डॉ. विद्यावती " मालविका "  हिन्दी साहित्य की विदुषी लेखिकाओं में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं। " बौद्ध धर्म पर मध्ययुगीन हिन्दी संत साहित्य का प्रभाव " विषय में पीएच.डी उपाधि प्राप्त डॉ. विद्यावती " मालविका "  की लगभग 40 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

पाठक मंच

पाठक मंच सागर नगर की मासिक गोष्ठी में लेखक साने गुरुजी के उपन्यास "श्याम की मां" (प्रसिद्ध मराठी लेखक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पांडुरंग सदाशिव साने की मूल मराठी पुस्तक "श्यामची आई " का संध्या पेडणेकर द्वारा हिन्दी अनुवाद ) पर चर्चा हुई.
तस्वीरों में डॉ. वर्षा सिंह, डॉ. शरद सिंह एवं अन्य

सामयिक सरस्वती में मेरी ग़ज़लें

सामयिक सरस्वती में प्रकाशित मेरी ग़जलें

बुधवार, नवंबर 15, 2017

‘सामयिक सरस्वती’ पत्रिका में मेरी छः ग़ज़लें - डॉ वर्षा सिंह

Ghazals of Dr Varsha Singh in  Samayik Saraswati Oct.-Dec 2017

Ghazals of Dr Varsha Singh in  Samayik Saraswati Oct.-Dec 2017
हिन्दी साहित्य जगत् की लोकप्रिय एवं महत्वपूर्ण पत्रिका ‘‘सामयिक सरस्वती’’ के अक्टूबर-दिसम्बर 2017 अंक में मेरी छः ग़ज़लें प्रकाशित हुई हैं।
मैं आभारी हूं ‘‘सामयिक सरस्वती’’ के संपादक महेश भारद्वाज जी की जिन्होंने मेरी ग़ज़लों को अपनी पत्रिका में स्थान दिया।

शुक्रवार, नवंबर 10, 2017

En Evening with Coffee

Dr Varsha Singh

आया दिन उजियाला


Ghazal by Dr Varsha Singh

बीती रात जुन्हाई वाली
आया दिन उजियाला
करना है जो आज करो, कल
किसने देखा- भाला
      - डॉ. वर्षा सिंह

जागी आंखों वाला सपना